अपामार्ग के फायदे और नुकसान: उपयोग करने से पहले जानें जरूरी बातें
अपामार्ग आयुर्वेद में वर्णित एक पारंपरिक औषधीय पौधा है, जिसे भारत के कई क्षेत्रों में चिरचिटा या लटजीरा जैसे स्थानीय नामों से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Achyranthes aspera है। पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धतियों में इस पौधे की जड़, पत्तियों, बीजों और…
काली मूसली क्या है? इसके पारंपरिक उपयोग, पहचान और जरूरी सावधानियाँ
काली मूसली (Kali Musli) आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस्तेमाल होने वाली एक औषधीय वनस्पति है। इसका वानस्पतिक नाम Curculigo orchioides Gaertn. है। इसे अंग्रेज़ी में Black Musli भी कहा जाता है। इस पौधे के भूमिगत भाग का पारंपरिक रूप से औषधीय…
Bhumyamalaki: A Complete Guide to Benefits, Uses, Dosage & Safety
Bhumyamalaki is a traditional Ayurvedic herb widely used in India, particularly in formulations and practices related to the liver, digestion and urinary system. It is commonly known as Bhumi Amla or Bhui Amla because of its small fruits and its…
Kalmegh: A Complete Guide to Its Benefits, Uses, Dosage & Safety
Kalmegh is one of the most distinctly bitter herbs used in Ayurveda. Known botanically as Andrographis paniculata, it has traditionally been used in Ayurvedic practice in contexts related to digestion, appetite, seasonal health and the balance of Pitta…
Vacha: A Complete Guide to Its Uses, Benefits, Dosage & Safety
Vacha (Acorus calamus), commonly known as Bach or Sweet Flag, is an aromatic herb that has been used in Ayurveda for centuries. Its rhizome is traditionally used in Ayurvedic preparations, particularly in relation to speech, memory and cognition,…
यष्टिमधु (मुलेठी): इसके पारंपरिक उपयोग और लाभों के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका
पीढ़ियों से मुलेठी भारतीय घरों में एक जाना-पहचाना नाम रही है। बहुत से लोग इसे गले की खराश के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली मीठे स्वाद वाली जड़ के रूप में जानते हैं, जबकि आयुर्वेद में इसे यष्टीमधु या मधुयष्टी के नाम से जाना जाता है। लेकिन यष्टीमधु में इसके अलावा भी बहुत कुछ है...
धन्वन्तरम तैल: इसके पारंपरिक उपयोगों और लाभों के लिए एक आयुर्वेदिक मार्गदर्शिका
आयुर्वेद में अभ्यंग (तेल मालिश) और अन्य चिकित्सीय प्रक्रियाओं जैसी बाहरी चिकित्सा पद्धतियों के हिस्से के रूप में औषधीय तेलों के उपयोग की एक लंबी परंपरा रही है। इन नुस्खों में, धनवंतरम तेल, जिसे धनवंतरम तैल या धनवंतरम तैलम भी कहा जाता है,...
पुष्यानुग चूर्ण: महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन
अति अत्यधिक योनि स्राव, असामान्य रूप से भारी मासिक धर्म रक्तचाप और अन्य प्रकार के असामान्य जननांग स्राव जैसी महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर आयुर्वेद में सदियों से चर्चा की गई है। इनसे जुड़ी शास्त्रीय फॉर्मूलेशनों में...
हींग्वाष्टक चूर्ण क्या है? जानिए इसके फायदे, उपयोग और सेवन का सही तरीका
खाना खाने के बाद पेट फूलना, गैस बनना, डकार आना, पेट में भारीपन या भूख कम लगना जैसी समस्याएं काफी आम हैं। आयुर्वेद में ऐसी पाचन संबंधी परेशानियों को समझने के लिए अग्नि (पाचन शक्ति), वात और पाचन प्रक्रिया जैसे कॉन्सेप्ट्स को महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हीं…
निंबादी चूर्ण: लाभ, उपयोग, घटक, खुराक और सावधानियां
निम्बादि चूर्ण एक पारंपरिक आयुर्वेदिक पॉलीहर्बल फॉर्मूलेशन है जिसका पारंपरिक रूप से कुछ त्वचा विकारों और वातरक्त के प्रबंधन में उपयोग किया जाता है, जो कि आधुनिक临床 चर्चाओं में आमतौर पर गट (gout) से संबंधित एक आयुर्वेदिक स्थिति है। सादे नीम के चूर्ण के विपरीत,…